तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं
जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी सकूँ
तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही
जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ
तुम दर्द -ऐ -दिल का वो मर्ज़ भी नहीं
जिससे मै अपना दर्द छुपा सकूँ
पर तुम ,
तुम दिल में बसा वो शख्स हो
जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ
जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ।