Tuesday, 24 March 2026

सिर्फ तुम

तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं 

जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी सकूँ


तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही 

जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ 


तुम दर्द -ऐ -दिल का वो मर्ज़ भी नहीं 

जिससे मै अपना दर्द छुपा सकूँ 


पर तुम ,


तुम दिल में बसा वो शख्स हो 

जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ 

जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ। 







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सिर्फ तुम

तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं  जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी  सकूँ तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही  जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ ...