Tuesday, 24 March 2026

सिर्फ तुम

तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं 

जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी सकूँ


तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही 

जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ 


तुम दर्द -ऐ -दिल का वो मर्ज़ भी नहीं 

जिससे मै अपना दर्द छुपा सकूँ 


पर तुम ,


तुम दिल में बसा वो शख्स हो 

जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ 

जिसे मरकर भी मैं दफना न सकूँ। 







Monday, 20 November 2023

हाँ , हूँ मैं एक नारी

 हाँ , हूँ  मैं एक नारी

पर क्या यह भी है गलती हमारी?

स्त्री के रूप में जन्म लिया

अपना हर एक कर्म किया।

फिर भी हे समाज तुम्हें शिकायत है क्या?

मुझमें ही ऐसी कमी है क्या?


जननी के रूप में तुम्हारा पालन पोषण किया

ममता से तुम्हारा आंगन भर दिया।

बेटी के रूप में घर में रौनक ले आई

बहन बनके तुम्हारी हर गलती छुपाई।

पत्नी के रूप में जीवनसाथी बन आई 

और न जाने कितनी भूमिकाएं हर दिन हसी खुशी है निभाई।

अपने हर धर्म को सच्ची निष्ठा से निभाया

पर फिर भी पता नहीं हे समाज तुम्हें मुझसे शिक़ायत है क्या?

मुझमें ही ऐसी कमी है क्या?


"ये मत पहनो, वो मत करो"

अपने इन शब्दों से तुमने मुझे बांध रखा है

इन बेड़ियों के चंगुल में मेरा दम घुट रहा है।

ऐसा कुछ नही है जो मैं न कर सकती हूँ 

बस तुम्हारे प्रोत्साहन की उम्मीद तो कर सकती हूँ ?


घर हो या दफ्तर, इंजीनियर बनू या शिक्षक

मैं जो चाहूं वो कर सकती हूं

अपने सपनो की उड़ान मैं खुद भर सकती हूं।

इस हक़ और सम्मान की लड़ाई मैं लड़ती रहूंगी

और देखना अंत में जीत हासिल मैं ही करुँगी ।

हाँ , हूँ मैं एक नारी

पर क्या यह भी है गलती हमारी?

~ स्नेहा गुप्ता
















Sunday, 19 November 2023

माना कि तुम बड़े हो रहे हो..


 माना कि तुम बड़े हो रहे हो।

पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?

हाॅं , स्कूल से निकल गए

पर अभी भी तो कॉलेज/ ऑफिस के बाद 

घर जाने की राह तो देखते हो।

गेम्स पीरियड मिलें न मिले 

जिंदगी के खेल तुम सब बखूबी खेल रहे हो।।


माना कि तुम बड़े हो रहे हो

पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?

वो रूठना मनाना आज भी तो चलता है।

दिल के दरवाजे फिर खोल के तो देखो

आज भी दोस्ती का ठिकाना अपना सा लगता है।

बचपन में समय ही समय था 

और आज अपने लिए भी दो वक्त नहीं है ।

किस दौड़ में भाग रहे हो

जहा अपनी जीत में भी

सौभाग्य प्राप्त नही है।।


माना कि तुम बड़े हो रहे हो 

पर क्यों ये बचपन खो रहे हो?

इस उम्र की सीमा का कोई लक्ष्य नहीं है 

जो आज तुम्हारा है वो कल नही है ।

इस जीवन तराजू़ का कोई पक्ष नहीं है

बचपन को तोलकर देखो 

इससे अनमोल कोई नही है।।


अपने अंदर के बच्चे को

हमेशा संभालकर रखो।

दिल तो बच्चा है जी 

खुद को ये बताकर रखो ।

फिर देखो ये जीवन कैसे हसीन लगता है 

बचपन का दौर सबसे रंगीन लगता है।।

माना कि तुम बड़े हो रहे हो

पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?

                

                                           ~स्नेहा गुप्ता 






























Monday, 7 August 2023

बारिश की बूंदे

ये बारिश की बूंदे 

अक्सर कई  यादें ताज़ा करती हैं 

कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से 

आँखे ये नाम कर देती हैं 


मिट्टी की सौंधी खुशबू में 

जो सुकून छिपा हुआ है 

मिलता कहाँ है  ढूंढने पर भी हवाओं में 

देखो तोह सिर्फ पानी 

पर गौर से सोचो 

तोह यही है जन्नत की  सियाही 


यादों की बारिश में 

उमीदों की छतरी खोल 

अपने मन से नफरत हिंसा और घमंड की सारी  जंजीरें और बेड़ियाँ तोड़ दो 


बारिश की बूंदे नापाक आग बुझा देंगी 

दिल में प्रेम और धैर्य के बीज बो देंगी 


क्योकि ये बारिश की बूंदे 

अक्सर कई  यादें ताज़ा करती हैं 

कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से 

आँखे ये नाम कर देती हैं। 





Monday, 20 March 2023

समय समय की बात है

समय- समय की बात है 

समय ही तो आज है।  

फिर क्यों कल की चिंता में 

व्यर्थ करे अनमोल पल 

आज  की कीमत आज है।


घडी की सुई को अपने 

लक्ष्य की सीमा मान लो। 

समय से हर काम करो 

समय पर आराम करो। 

क्योंकि  समय -समय की बात है 

समय ही तो आज है। 


एक बार जो बीत गया 

तो फिर लौट न आएगा। 

अंत में फिर तू मानव बस पछताता ही रह जाएगा 

यह आज की ही  बाते 

कल बस यादें बनकर रह जाएँगी।


तो क्यों न अपने भविष्य को उज्जवल बनाए

जब आज बेहतरीन होगा 

तभी तो कल रंगीन होगा। 

क्योकि समय -समय की बात है 

समय ही तो आज है।


                                   ~ स्नेहा गुप्ता 



 

Thursday, 16 March 2023

मेहनत से न कतरा तू

 मेहनत से न कतरा तू 

रास्ता अपने आप बन जाएगा ।

मंजिल लगे चाहे असंभव 

आसमान तेरे पास चलकर आएगा ।।

अपनी सोच के इस भय को तू और न बढ़ने दे 

हृदय के इस संकोच को तू अपने ऊपर न चढ़ने दे।

रख हौसला, हिम्मत जुटा 

ये जिंदगी तेरी है इक दुआ ।।

मेहनत से न कतरा तू 

रास्ता अपने आप बन जाएगा ।

मंजिल लगे चाहे असंभव 

आसमान तेरे पास चलकर आएगा ।।

                                                      ~स्नेहा गुप्ता 

सिर्फ तुम

तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं  जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी  सकूँ तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही  जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ ...