Monday, 7 August 2023

बारिश की बूंदे

ये बारिश की बूंदे 

अक्सर कई  यादें ताज़ा करती हैं 

कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से 

आँखे ये नाम कर देती हैं 


मिट्टी की सौंधी खुशबू में 

जो सुकून छिपा हुआ है 

मिलता कहाँ है  ढूंढने पर भी हवाओं में 

देखो तोह सिर्फ पानी 

पर गौर से सोचो 

तोह यही है जन्नत की  सियाही 


यादों की बारिश में 

उमीदों की छतरी खोल 

अपने मन से नफरत हिंसा और घमंड की सारी  जंजीरें और बेड़ियाँ तोड़ दो 


बारिश की बूंदे नापाक आग बुझा देंगी 

दिल में प्रेम और धैर्य के बीज बो देंगी 


क्योकि ये बारिश की बूंदे 

अक्सर कई  यादें ताज़ा करती हैं 

कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से 

आँखे ये नाम कर देती हैं। 





सिर्फ तुम

तुम कागज़ पर लिखा हुआ वो शब्द नहीं  जिसे स्याही से लिखकर मैं मिटा भी  सकूँ तुम बाज़ारी स लिया हुआ वो क़र्ज़ नही  जिसे सब बेचकर मैं चुका भी सकूँ ...