ये बारिश की बूंदे
अक्सर कई यादें ताज़ा करती हैं
कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से
आँखे ये नाम कर देती हैं
मिट्टी की सौंधी खुशबू में
जो सुकून छिपा हुआ है
मिलता कहाँ है ढूंढने पर भी हवाओं में
देखो तोह सिर्फ पानी
पर गौर से सोचो
तोह यही है जन्नत की सियाही
यादों की बारिश में
उमीदों की छतरी खोल
अपने मन से नफरत हिंसा और घमंड की सारी जंजीरें और बेड़ियाँ तोड़ दो
बारिश की बूंदे नापाक आग बुझा देंगी
दिल में प्रेम और धैर्य के बीज बो देंगी
क्योकि ये बारिश की बूंदे
अक्सर कई यादें ताज़ा करती हैं
कुछ खट्टे कुछ मीठे लम्हों से
आँखे ये नाम कर देती हैं।
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