पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?
हाॅं , स्कूल से निकल गए
पर अभी भी तो कॉलेज/ ऑफिस के बाद
घर जाने की राह तो देखते हो।
गेम्स पीरियड मिलें न मिले
जिंदगी के खेल तुम सब बखूबी खेल रहे हो।।
माना कि तुम बड़े हो रहे हो
पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?
वो रूठना मनाना आज भी तो चलता है।
दिल के दरवाजे फिर खोल के तो देखो
आज भी दोस्ती का ठिकाना अपना सा लगता है।
बचपन में समय ही समय था
और आज अपने लिए भी दो वक्त नहीं है ।
किस दौड़ में भाग रहे हो
जहा अपनी जीत में भी
सौभाग्य प्राप्त नही है।।
माना कि तुम बड़े हो रहे हो
पर क्यों ये बचपन खो रहे हो?
इस उम्र की सीमा का कोई लक्ष्य नहीं है
जो आज तुम्हारा है वो कल नही है ।
इस जीवन तराजू़ का कोई पक्ष नहीं है
बचपन को तोलकर देखो
इससे अनमोल कोई नही है।।
अपने अंदर के बच्चे को
हमेशा संभालकर रखो।
दिल तो बच्चा है जी
खुद को ये बताकर रखो ।
फिर देखो ये जीवन कैसे हसीन लगता है
बचपन का दौर सबसे रंगीन लगता है।।
माना कि तुम बड़े हो रहे हो
पर किसने कहा तुम बचपन खो रहे हो?
~स्नेहा गुप्ता

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